IIT बाबा अभय सिंह की 10वीं, 12वीं की मार्कशीट हुई वायरल, महाकुंभ 2025 में बने आकर्षण का केंद्र

IITian बाबा अभय सिंह के फिजिक्स टीचर ने खोले कई राज, स्कूल लाइफ से जुड़े कई किस्से भी किए साझा - IIT BABA ABHAY SINGH

प्रयागराज, 16 फरवरी 2025: महाकुंभ 2025 में इस बार आस्था के साथ ही एक अनोखी कहानी भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र और एयरोस्पेस इंजीनियर अभय सिंह, जिन्हें अब IIT बाबा के नाम से जाना जाता है, उनकी 10वीं और 12वीं की मार्कशीट हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। इस मार्कशीट से पता चलता है कि अभय सिंह न केवल आध्यात्मिक ज्ञान में प्रवीण हैं, बल्कि एक समय में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी अव्वल थे। उन्होंने 10वीं में 93% और 12वीं में 92.4% अंक प्राप्त किए थे।

IIT बॉम्बे से अध्यात्म तक की रोमांचक यात्रा

अभय सिंह का जीवन यात्रा असाधारण रही है। 2008 में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 731 के साथ प्रतिष्ठित IIT बॉम्बे में प्रवेश लिया था और 2012 में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में स्नातक किया। उनका नाम उन प्रतिभाशाली छात्रों में शामिल था, जो देश के श्रेष्ठ इंजीनियरिंग संस्थानों में स्थान पाते हैं। स्नातक के बाद उन्होंने कनाडा में एक नामी कंपनी में काम किया, जहां उनकी वार्षिक सैलरी ₹36 लाख थी।

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लेकिन उनकी जीवन की राह अचानक बदल गई। जहां अन्य IIT ग्रेजुएट्स बड़े कॉरपोरेट्स में उच्च पदों तक पहुंचने का सपना देखते हैं, वहीं अभय सिंह ने इसके विपरीत रास्ता चुना। वे भौतिक सुख-सुविधाओं से दूर होते गए और एक गहरे आध्यात्मिक खोज की ओर बढ़ने लगे। उन्होंने कनाडा की अपनी नौकरी छोड़ दी और भारत लौट आए, जहां उन्होंने आत्म-अन्वेषण की यात्रा शुरू की।

दर्शनशास्त्र और फोटोग्राफी में भी थी गहरी रुचि

संन्यास लेने से पहले अभय सिंह ने केवल इंजीनियरिंग ही नहीं, बल्कि डिजाइनिंग और कला के क्षेत्र में भी गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने M.Des (मास्टर्स इन डिज़ाइन) में भी पढ़ाई की और कुछ समय के लिए फोटोग्राफर के रूप में भी कार्य किया। उनके जीवन में परिवर्तन का सबसे बड़ा कारण दर्शनशास्त्र की ओर बढ़ता उनका झुकाव था। उन्होंने सुकरात, प्लेटो और उत्तर-आधुनिकता जैसे महान विचारकों के सिद्धांतों का अध्ययन किया और धीरे-धीरे यह महसूस किया कि भौतिक सफलता और धन जीवन का अंतिम उद्देश्य नहीं हो सकता।

IIT के सहपाठियों और दोस्तों के लिए बना रहस्य

IIT बाबा के इस परिवर्तन ने उनके सहपाठियों और दोस्तों को हैरान कर दिया है। उनके एक पुराने मित्र और सहपाठी गौरव गोयल ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा, “अभय शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल थे। वे क्लास में टॉप करते थे और हमें उम्मीद थी कि वे विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में बड़ा नाम कमाएंगे। लेकिन उन्होंने इतनी कम उम्र में संन्यास का निर्णय क्यों लिया, यह समझना मुश्किल है।”

उनके इस असाधारण परिवर्तन से न केवल उनके पुराने दोस्त बल्कि आम लोग भी प्रभावित हो रहे हैं। IIT से निकला एक होनहार वैज्ञानिक अब आध्यात्मिक गुरु बनकर लोगों को जीवन का गूढ़ ज्ञान दे रहा है। महाकुंभ 2025 में IIT बाबा लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं, और उनके प्रवचनों को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुट रहे हैं।

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आध्यात्मिकता की ओर बढ़ता एक नया युग

IIT बाबा अभय सिंह की कहानी यह दर्शाती है कि आधुनिक शिक्षा और विज्ञान के बावजूद, जीवन में आध्यात्मिकता का महत्व बना रहता है। यह यात्रा केवल IIT से संन्यास तक की नहीं है, बल्कि यह भौतिकता से परे आत्मबोध की खोज का भी एक उदाहरण है। उनके विचार और शिक्षाएं कई युवाओं को प्रेरित कर रही हैं, जो करियर और जीवन की दौड़ में उलझे हुए हैं।

उनका जीवन यह संदेश देता है कि सफलता केवल ऊँचे पद और मोटी सैलरी में नहीं, बल्कि सच्चे आत्मबोध और शांति में भी हो सकती है। महाकुंभ में IIT बाबा की उपस्थिति यह साबित कर रही है कि आधुनिक शिक्षा और आध्यात्मिकता एक साथ चल सकते हैं, और एक वैज्ञानिक मन भी आध्यात्मिक खोज की ओर अग्रसर हो सकता है।

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जय चन्द्र झा हास्य और व्यंग्य लेखन में माहिर हैं, जिनका इस क्षेत्र में 20 वर्षों का अनुभव है। उनकी रचनाएँ मिथिला की संस्कृति, समाज और जीवन के विभिन्न पहलुओं पर हास्यपूर्ण व तीखे व्यंग्य के साथ गहरी छाप छोड़ती हैं।
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